Chapter 10 · Verse 5

Yoga through Appreciating the Infinite Opulences of God

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः। भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः
tuṣṭis tapo dānaṁ yaśo bhāvā bhūtānāṁ matta pṛthag-vidhāḥ

Word Meanings

ahiṁsā samatā tuṣṭiḥ tapaḥ dānam yaśaḥ ayaśaḥ bhavanti bhāvāḥ bhūtānām mattaḥ eva pṛthakvidhāḥ

Translation

अहिंसा, समता, संतोष, तप, दान, यश और अपयश — प्राणियों के ये सभी विविध भाव मुझसे ही उत्पन्न होते हैं।

Commentary

व्याख्या--'बुद्धिः'--उद्देश्यको लेकर निश्चय करनेवाली वृत्तिका नाम बुद्धि है।'ज्ञानम्'--सार-असार, ग्राह्य-अग्राह्य, नित्य-अनित्य, सत्-असत्, उचित-अनुचित, कर्तव्यअकर्तव्य --ऐसा जो विवेक अर्थात् अलगअलग जानकारी है, उसका नाम 'ज्ञान' है। यह ज्ञान (विवेक) मानवमात्रको भगवान्से मिला है।