Chapter 1 · Verse 5

Arjuna's Dilemma

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः
dhṛiṣhṭaketuśhchekitānaḥ kāśhirājaśhcha vīryavān kuntibhojaśhcha śhaibyaśhcha yudhāmanyuśhcha vikrānta uttamaujāśhcha vīryavān

Word Meanings

dhṛiṣhṭaketuḥ chekitānaḥ kāśhirājaḥ cha vīrya-vān purujit kuntibhojaḥ cha śhaibyaḥ cha nara-puṅgavaḥ yudhāmanyuḥ cha vikrāntaḥ uttamaujāḥ cha vīrya-vān

Translation

धृष्टकेतु, चेकितान, पराक्रमी काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य भी हैं।

Commentary

व्याख्या--'अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि'-- जिनसे बाण चलाये जाते हैं, फेंके जाते हैं, उनका नाम 'इष्वास' अर्थात् धनुष है। ऐसे बड़े-बड़े इष्वास (धनुष) जिनसे पास हैं, वे सभी 'महेष्वास' हैं। तात्पर्य है कि बड़े धनुषोंपर बाण चढ़ाने एवं प्रत्यञ्चा खींचनेमें बहुत बल लगता है। जोरसे खींचकर छोड़ा गया बाण विशेष मार करता है। ऐसे बड़े-बड़े धनुष पासमें होनेके कारण ये सभी बहुत बलवान् और शूरवीर हैं। ये मामूली योद्धा नहीं हैं। युद्धमें ये भीम और अर्जुनके समान हैं अर्थात् बलमें ये भीमके समान और अस्त्र-शस्त्रकी कलामें ये अर्जुनके समान हैं।