Chapter 9 · Verse 13

Yoga through the King of Sciences

महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः। भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम्
mahātmānas māṁ daivīṁ prakṛitim bhajantyananya-manaso bhūtādim

Word Meanings

mahā-ātmānaḥ tu mām pārtha daivīm prakṛitim āśhritāḥ bhajanti ananya-manasaḥ jñātvā bhūta ādim avyayam

Translation

परन्तु हे पार्थ! दैवी प्रकृति का आश्रय लेने वाले महात्मा लोग मुझे समस्त प्राणियों का मूल कारण और अविनाशी जानकर, अनन्य मन से मेरा भजन करते हैं।

Commentary

व्याख्या--'महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः'--पूर्वश्लोकमें जिन आसुरी, राक्षसी और मोहिनी स्वभावके आश्रित मूढ़लोगोंका वर्णन किया था, उनसे दैवी-सम्पत्तिके आश्रित महात्माओंकी विलक्षणता बतानेके लिये ही यहाँ 'तु' पद आया है।