Chapter 8 · Verse 13

Path of the Eternal God

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्। यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्
oṁ ityekākṣharaṁ dehaṁ sa paramāṁ

Word Meanings

om iti eka-akṣharam brahma vyāharan mām anusmaran yaḥ prayāti tyajan deham saḥ yāti paramām gatim

Translation

जो व्यक्ति 'ॐ' — इस एक अक्षर ब्रह्म का उच्चारण करते हुए और मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

Commentary

व्याख्या--'सर्वद्वाराणि संयम्य'--(अन्तसमयमें) सम्पूर्ण इन्द्रियोंके द्वारोंका संयम कर ले अर्थात् शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध-- इन पाँचों विषयोंसे श्रोत्र, त्वचा, नेत्र, रसना और नासिका-- इन पाँचों ज्ञानेन्द्रियोंको तथा बोलना, ग्रहण करना, गमन करना, मूत्र-त्याग और मल-त्याग -- इन पाँचों क्रियाओंसे वाणी, हाथ, चरण, उपस्थ और गुदा--इन पाँचों कर्मेन्द्रियोंको सर्वथा हटा ले। इससे इन्द्रियाँ अपने स्थानमें रहेंगी।