Chapter 3 · Verse 23

Path of Selfless Service

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः
hyahaṁ varteyaṁ karmaṇyatandritaḥ vartmānuvartante

Word Meanings

yadi hi aham na varteyam jātu karmaṇi atandritaḥ mama vartma anuvartante manuṣhyāḥ pārtha sarvaśhaḥ

Translation

हे पार्थ! यदि मैं कभी सावधान होकर कर्म न करूँ, तो सभी मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करेंगे।

Commentary

व्याख्या-- [बाईसवें श्लोकमें भगवान्ने अन्वय-रीतिसे कर्तव्य-पालनकी आवश्यकताका प्रतिपादन किया और इन श्लोकोंमें भगवान् व्यतिरेक-रीतिसे कर्तव्य-पालन न करनेसे होनेवाली हानिका प्रतिपादन करते हैं।]